डिफरेंटली-एबल्ड

अशक्त व्यक्तियों के जीवन स्तर में सुधार और उनकी स्वतंत्रता में वृद्धि करने के लिए सूचना एवं प्रौद्योगिकी में अभूतपूर्व क्षमता है। नेत्रहीन व्यक्ति, जो ब्रेल पर सूचना उपलब्ध होने की महीनों अथवा यहां तक कि वर्षों प्रतीक्षा करते हैं, अब उसी समय जानकारी प्राप्त कर सकते हैं, जब वह जानकारी सामान्य जनों के लिए उपलब्ध कराई जाती है। जिन व्यक्तियों को पैन अथवा की-बोर्ड के उपयोग में कठिनाई होती है, वे अपने कार्यों के लिए अब नवीनतम स्पीच रिकॉग्निशन सॉफ्टवेयर का उपयोग कर सकते हैं। यद्यपि इन तकनीकों का बहुत महत्व है, कंप्यूटर क्रांति में बहुत से अशक्त व्यक्ति अभी पीछे रह गए हैं। भारत में, लगभग 70 मिलियन व्यक्ति अशक्त हैं और केवल 2% व्यक्ति ही कंप्यूटर का उपयोग करते हैं और उनमें से 0.5% ने अभी भी इंटरनेट का उपयोग नहीं किया है। बढ़ते दबाव को देखत हुए, इस दूरी को पाटने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी विभाग (DIT) ने ई.आर.नेट के लिए फंड की व्यवस्था की है ताकि वह अशक्त बच्चों में कंप्यूटर कौशल बढ़ाने के लिए कार्रवाई कर सके। ई.आर.नेट इंडिया ने पहले ही राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली और तमिलनाडु राज्य में 21 आईसीटी वोकेशनल सेंटर स्थापित किए हुए हैं। ई.आर.नेट इंडिया ने पूरे देश में ऐसे 100 और सेंटर खोलने का प्रयास किया है। इस चरण में बहु-अशक्तता वाले व्यक्तियों, कुष्ठ रोगियों और शारीरिक रूप से विकलांगों को लिया जा रहा है। 17 राज्यों के 50 स्कूलों में आईसीटी इन्फ्रास्ट्रक्चर की स्थापना का कार्य पूरा हो चुका है। इनमें प्रत्येक सेंटर में कंप्यूटरों, सहायक उपकरणों, इंटरनेट और इन्ट्रानेट एक्सेस, एप्लीकेशंस और उपयुक्त उपकरणों की व्यवस्था कीजा रही है। कंप्यूटर पाठ्यक्रम आयोजित करने, सहायक उपकरणों का उपयोग करने, जॉब ओरिएंटिड एप्लीकेशंस पर कौशल के विकास और साथ ही साथ सॉफ्ट-स्किल, जैसे अंग्रेजी भाषा के उपयोग एवं व्यक्तित्व के विकास के लिए अनुदेशकों को भी प्रशिक्षित किया जा रहा है। शेष राज्यों में अन्य 50 सेंटर स्थापित किए जाने का कार्य आरंभ कर दिया गया है।

 

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